Happy Dussehra Poems in Hindi & English

Today here we are providing you Happy Dussehra Poems in Hindi & English language. As we know that Poems are an integral part of any festival that is being celebrated in India or any other in different countries. The festival of Dussehra has been considered to symbolize the celebration of good over evil while marking the Hindu god Rama’s victory over the demon king Ravan to rescue his abducted wife Sita. Another reason for celebrating Dussehra festival is to please Mother Goddess Durga because the new harvest season starts at this time. Here in this section, we’ve collected Happy Dasara Poems in Hindi Fonts, Inspirational Happy Vijayadashami Poems, Motivational Dussehra Kavita, Lord Ram and Ravan Poetry, Short Dasara Kavita for Kids & Children. Happy Dussehra 2018  🙂

Inspirational Happy Dussehra Poems in Hindi & English with Images

Happy Dussehra Poems in Hindi

1) Happy Dussehra Poems in Hindi for Kids

आज दशहरे की घड़ी आई
झूठ पर सच की जीत है भाई

रामचन्द्र ने रावण मारा
तोड़ दिया अभिमान भी सारा

एक बुराई रोज हटाओ
और दशहरा रोज मनाओ

हार के भी वो जीता रावण
मुक्ति पाई राम के चरणन्

– गुलशन मदान

 

2) Happy Dussehra Poems in English

Today is the day when we burn all our sins,
And promise to begin all over again,
Flames come and take all the darkness away,
Light shines and makes it own way,
Because this is the festival where truth wins,

We make our way towards a bright future
And with our heads high and up chins,
Take a vow to do all this together,
As we burn the ravana inside us
Which is kept like a false heather!
Happy dusherra!

– Namrata Bathija

 

3) Inspirational Dasara Poem on सत्य की जीत

दशहरा का तात्पर्य, सदा सत्य की जीत।
गढ़ टूटेगा झूठ का, करें सत्य से प्रीत॥

सच्चाई की राह पर, लाख बिछे हों शूल।
बिना रुके चलते रहें, शूल बनेंगे फूल॥

क्रोध, कपट, कटुता, कलह, चुगली अत्याचार
दगा, द्वेष, अन्याय, छल, रावण का परिवार॥

राम चिरंतन चेतना, राम सनातन सत्य।
रावण वैर-विकार है, रावण है दुष्कृत्य॥

वर्तमान का दशानन, यानी भ्रष्टाचार।
दशहरा पर करें, हम इसका संहार॥

– अजहर हाशमी

 

 

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4) Happy Dussehra Poetry in English

Implies Dussehra, the victory of Truth.
defenses broken, of lies, love is from the truth.
On the path of truth, millions are lined spine
continue to run without stopping, will be the flower spike.
Anger, hypocrisy, bitterness, strife, backbiting torture
deceitfulness, hatred, injustice, deceit, Ravana’s family.
Eternal consciousness Ram, Ram eternal truths.
Ravana revenge – disorder, Ravana’s malfeasance.
Dshann present, i.e. corruption.
Dussehra now on, we annihilate it.

 

5) Motivational Poem on आया दशहरा

विजय सत्य की हुई हमेशा,
हारी सदा बुराई है,
आया पर्व दशहरा कहता
करना सदा भलाई है.

रावण था दंभी अभिमानी,
उसने छल -बल दिखलाया,
बीस भुजा दस सीस कटाये,
अपना कुनबा मरवाया.

अपनी ही करनी से लंका
सोने की जलवाई है.

मन में कोई कहीं बुराई
रावण जैसी नहीं पले,
और अँधेरी वाली चादर
उजियारे को नहीं छले.

जिसने भी अभिमान किया है,
उसने मुँह की खायी है.

आज सभी की यही सोच है,
मेल -जोल खुशहाली हो,
अंधकार मिट जाए सारा,
घर घर में दिवाली हो.

मिली बड़ाई सदा उसी को
जिसने की अच्छाई है.

– Nitin Mukesh

 

6) दशहरा कविता हिंदी में

आ गया पावन दशहरा
फिर हमे सन्देश देने
आ गया पावन दशहरा।
तुम संकटों का हो घनेरा
हो न आकुल मन ये तेरा
संकटो के तम छटेंगे
होगा फिर सुन्दर सवेरा
धैर्य का तू ले सहारा।
द्वेष कितना भी हो गहरा
हो न कलुषित मन ये तेरा
फिर ये टूटे दिल मिलेंगे
होगा जब प्रेमी चितेरा
बन शमी का पात प्यारा।
सत्य हो कितना प्रताड़ित
पर न हो सकता पराजित
रूप उसका और निखरे
जानता है विश्व सारा
बन विजय “स्वर्णिम सितारा”।

∼ सत्यनारायण सिंह

 

 

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Happy Dasara Poems

 

7) Ram Ravan Dussehra Kavita for Children

किस्सा एक पुराना बच्चों,
लंका में एक था रावण,
राजा एक महाभिमानी
काँपता जिससे कण कण..
उस अभिमानी रावण ने था
सबको खूब सताया
रामचंद्र जब आये वन में
सीता को हर लाया
झील मिल झील मिल सोने की
लंका पैरो पे झुकती
सुंदर थी लंका, लंका में
सोना ही सोना था
तभी राम आये बंदर, भालू
की सेना लेकर
सादा निशाना सच्चाई का
तीर चलाया
लोभ पाप की लंका धू धू
जल कर राख हो गयी
दिए जलते तभी धरती पर
अगिनत लाखों लाख
इसलिए आज धूम हैं,
रावण आज मारा था
काटे शीश दस दस बरी
उतरा भार धरा का
लेकिन सोचो की
रावण फिर ना छल कर पाए
कोई अभिमानी ना फिर
काला राज चलाये
तभी होंगी सच्ची दीवाली
होंगा तभी दशहरा
जगमग जगमग होंगा जब
फिर सच्चाई का चेहरा !!

 

8) Happy Dusshera Poems in Hindi Characters

भीतर के रावण को जो,आग खुद लगायेंगे ।
सही मायनों में वे ही ,दशहरा मनायेंगे।।

छिप कर बैठा ये दानव ,आज हर एक दिल में
भड़काता वैर की आग, हँसते-खेलते घरों में,
कलुषित मनोवासना को ,जो सदा मिटायेंगे।
सही मायनों में वे ही ,दशहरा मनाएंगे….।

मन रावण फुंकार करे ,रक्त अपनों का बहे
मूली गाजर के जैसे ,मानव आज कट रहे
दया धर्म सद् भावों के,जो दीप जलायेंगे।
सही मायनों में वे ही ,दशहरा मनाएंगे….।

मनाता है रंगरलियां ,ये काँटे बिखेरकर
दिखाता झूठे पंख है ,ये सत्य समेटकर
चुनकर काँटे राहों के,जो फूल बिछायेंगे।।
सही मायनों में वे ही ,दशहरा मनाएंगे….।

धन-वैभव की इच्छा से, सराबोर रहता हर पल
बुद्धि ज्ञान को बिसराये, दुष्कर्म करे हरपल
“पूर्णिमा” मरे जमीर को जो ,सचेत कर पायेंगे।
सही मायनों में वे ही ,दशहरा मनायेंगे….।

~ Dr. Purnima Rai

9) A Victory Day Poem on Dussehra 2018

Dusshera is a Victory Day,
Victory of Lord Ram over Raven,
Victory of almighty God over devil,
Victory of good over evil,
Victory of dharm over adharm.
It is a victory of life over death.

A victory of hope over despair,
A victory of creation over destruction,
A victory of light over darkness,
A victory of knowledge over ignorance.
A victory of justice over injustice,
Victory of dignity over oppression,
Alas! This victory will remain incomplete,
Till all the Kabeels, Sabeels and Afzals are hanged.

– Dr. Yogesh Sharma

 

 

10) Happy Vijayadashami Kavita in Hindi Fonts

विजयादशमी विजय का, पावन है त्यौहार।
जीत हो गयी सत्य की, झूठ गया है हार।।
रावण के जब बढ़ गये, भू पर अत्याचार।
लंका में जाकर उसे, दिया राम ने मार।।

विजयादशमी ने दिया, हम सबको उपहार।
अच्छाई के सामने, गयी बुराई हार।।
मनसा-वाता-कर्मणा, सत्य रहे भरपूर।
नेक नीति हो साथ में, बाधाएँ हों दूर।।

पुतलों के ही दहन का, बढ़ने लगा रिवाज।
मन का रावण आज तक, जला न सका समाज।।
राम-कृष्ण के नाम धर, करते गन्दे काम।
नवयुग में तो राम का, हुआ नाम बदनाम।।

आज धर्म की ओट में, होता पापाचार।
साधू-सन्यासी करें, बढ़-चढ़ कर व्यापार।।
आज भोग में लिप्त हैं, योगी और महन्त।
भोली जनता को यहाँ, भरमाते हैं सन्त।।

जब पहुँचे मझधार में, टूट गयी पतवार।
कैसे देश-समाज का, होगा बेड़ा पार।।

~ Dr. Roopchandra Shastri Mayank

 

11) रावण पर कविता

रावण शिव का परम भक्त था
बहुत बड़ा था ज्ञानी,
दस सिर बीस भुजाओं वाला
था राजा अभिमानी।
नहीं किसी की वह सुनता था
करता था मनमानी,
औरों को पीड़ा देने की
आदत रही पुरानी।
एक बार धारण कर उसने
तन पर साधु – निशानी,
छल से सीता को हरने की
हरकत की बचकानी।
पर – नारी का हरण न अच्छा
कह कह हारी रानी,
भाई ने भी समझाया तो
लात पड़ी थी खानी।
रामचन्द्र से युद्ध हुआ तो
याद आ गई नानी,
शिव को याद किया विपदा में
अपनी व्यथा बखानी।
जान बूझ कर बुरे काम की
जिसने मन में ठानी,
शिव ने भी सोचा ऐसे पर
अब ना दया दिखानी।
नष्ट हुआ सारा ही कुनबा
लंका पड़ी गँवानी,
मरा राम के हाथों रावण
होती खत्म कहानी।

~ सुरेश चन्द्र “सर्वहारा”

 

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